कुछ बड़े कारण: जापानी बुलेट ट्रेन की जगह अब Ahmedabad-Mumbai Bullet Train रूट पर दौड़ेगी वंदे भारत!
Ahmedabad-Mumbai Bullet Train: भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन परियोजना में बड़ा बदलाव हुआ है। जापानी बुलेट ट्रेन की जगह अब इस कॉरिडोर पर स्वदेशी तकनीक से बनी वंदे भारत सेमी हाई स्पीड ट्रेन दौड़ेगी। इस निर्णय ने देशभर में चर्चा का माहौल बना दिया है। आइए जानते हैं इस बदलाव के पीछे के 7 बड़े कारण और इससे देश को क्या फायदा होने वाला है।
1. जापानी बुलेट ट्रेन की कीमतों में जबरदस्त बढ़ोतरी
जब भारत और जापान के बीच बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर समझौता हुआ था, तब एक कोच की कीमत करीब 16 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन हाल ही में जापान ने इसकी कीमत बढ़ाकर प्रति कोच 50 करोड़ रुपये कर दी है। इसका मतलब हुआ कि एक 16 कोच की बुलेट ट्रेन की कीमत करीब 800 करोड़ रुपये हो गई। यह लागत भारतीय रेलवे के लिए अत्यधिक महंगी साबित हो रही थी।

2. स्वदेशी वंदे भारत की लागत और तकनीक में आत्मनिर्भरता
वंदे भारत ट्रेन पूरी तरह भारत में विकसित की गई है। इसकी लागत जापानी बुलेट ट्रेन के मुकाबले बहुत कम है और इसका रखरखाव भी आसान है। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा मिलेगा और देश आत्मनिर्भर बनेगा।
3. वंदे भारत की स्पीड भी शानदार
भारतीय रेलवे की नई वंदे भारत ट्रेन अधिकतम 280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है, जबकि इसे फिलहाल 250 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चलाने की योजना है। यह गति जापान, चीन और फ्रांस जैसी ट्रेन स्पीड से भले ही कम हो, लेकिन भारतीय संदर्भ में यह एक क्रांतिकारी बदलाव है।
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4. सूरत से बलिमोरा तक ट्रायल रन की तैयारी
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर का सूरत से बलिमोरा तक 50 किमी का सेक्शन लगभग तैयार है। रेल मंत्रालय के मुताबिक इस साल के अंत तक इस सेक्शन पर वंदे भारत का ट्रायल रन शुरू कर दिया जाएगा।
5. 2027 तक शुरू हो सकता है आम लोगों के लिए संचालन
अगर सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो 2027 तक आम जनता इस सेमी हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेन में सफर कर सकेगी। यह ट्रेन बैठने वाली होगी, जिसमें आठ-आठ कोच की दो ट्रेनों का संचालन होगा।
6. विदेशी निर्भरता में कमी
जापानी बुलेट ट्रेन पर आधारित प्रोजेक्ट पूरी तरह जापान की तकनीक, पार्ट्स और ट्रेनिंग पर निर्भर था। वहीं वंदे भारत प्रोजेक्ट भारत की अपनी तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। इससे भविष्य में रेलवे का विदेशी तकनीकों पर निर्भरता घटेगी।
7. मेक इन इंडिया को मिलेगा बूस्ट
वंदे भारत ट्रेन भारत में विकसित होने से देश की निर्माण शक्ति को मजबूती मिलेगी। यह ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई गति देगा और भारतीय इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने स्थापित करेगा।
क्या खोया और क्या पाया?
हालांकि जापानी बुलेट ट्रेन की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटे से ज्यादा होती, लेकिन उसकी लागत भी तीन गुना ज्यादा थी। वंदे भारत भले ही थोड़ी कम स्पीड से चले, लेकिन यह भारतीय संदर्भ में अधिक व्यवहारिक और फायदेमंद विकल्प है।
दुनिया में बुलेट ट्रेनों की स्पीड
- जापान: 603 किमी/घंटा
- चीन: 600 किमी/घंटा
- फ्रांस: 320 किमी/घंटा
- दक्षिण कोरिया: 305 किमी/घंटा
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत को अभी इन देशों की तुलना में लंबा रास्ता तय करना है, लेकिन वंदे भारत की शुरुआत इस दिशा में एक मजबूत कदम है।
निष्कर्ष
Ahmedabad-Mumbai Bullet Train प्रोजेक्ट में वंदे भारत का इस्तेमाल भारतीय रेलवे के लिए एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे न सिर्फ पैसे की बचत होगी बल्कि देश की तकनीकी क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा। जापानी बुलेट ट्रेन की जगह वंदे भारत का चयन एक समझदारी भरा निर्णय साबित हो सकता है, जो आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

