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Loco Pilot Washroom Secrets: 7 Shocking Truths You Didn’t Know About Train Drivers’ Bathroom Breaks. लोको पायलट वॉशरूम सीक्रेट्स: ट्रेन ड्राइवर के वॉशरूम ब्रेक से जुड़ी 7 चौंकाने वाली सच्चाइयाँ, जिनके बारे में आपने कभी नहीं सोचा होगा

लोको पायलट वॉशरूम सीक्रेट्स: ट्रेन ड्राइवर के वॉशरूम ब्रेक से जुड़ी 7 चौंकाने वाली सच्चाइयां

Loco Pilot Washroom: क्या आपने कभी सोचा है कि जब ट्रेन तेज़ी से दौड़ रही होती है और लोको पायलट को वॉशरूम जाना हो, तो वो क्या करते हैं? क्योंकि ट्रेन के इंजन में वॉशरूम की कोई सुविधा नहीं होती। लेकिन इसके पीछे की सच्चाई जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

1. इंजन में नहीं होता वॉशरूम – बड़ी चुनौती

भारतीय रेलवे के अधिकांश लोकोमोटिव इंजनों में वॉशरूम की कोई व्यवस्था नहीं होती। Loco Pilot Washroom की सुविधा न होने के बावजूद ट्रेन ड्राइवर घंटों तक ड्यूटी पर रहते हैं। यह उनकी नौकरी का एक बड़ा चैलेंज है, खासकर लंबी दूरी की ट्रेनों में।

Loco Pilot Washroom

2. स्टेशन पर होता है ब्रेक – वॉशरूम का सहारा

रांची रेल मंडल की सीनियर DCM शुचि सिंह ने बताया कि लोको पायलट आमतौर पर अगले स्टेशन पर रुककर वॉशरूम का इस्तेमाल करते हैं। Loco Pilot Washroom की कमी की भरपाई वे आने वाले रेलवे स्टेशनों पर उतरकर करते हैं।

3. हर 1-1.5 घंटे में रुकती है ट्रेन – मिलता है समय

अधिकतर ट्रेनें हर 60 से 90 मिनट में किसी न किसी स्टेशन पर रुकती हैं। इस ब्रेक का फायदा उठाकर लोको पायलट वॉशरूम जाते हैं। हालांकि यह सुविधा हर बार उपलब्ध नहीं होती, फिर भी यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है।

Loco Pilot Washroom

4. ट्रेन शुरू करने से पहले की जाती है तैयारी

ज्यादातर लोको पायलट ट्रेन शुरू करने से पहले ही वॉशरूम जाकर खुद को तैयार कर लेते हैं, ताकि बीच रास्ते में अधिक दिक्कत न हो। ट्रेन आमतौर पर 2-3 घंटे में किसी न किसी स्टेशन पर रुकती है, जिससे उन्हें राहत मिलती है।

5. कभी-कभी करना पड़ता है इंतजार

कुछ रूट्स पर ट्रेनें लंबे समय तक बिना रुके चलती हैं। ऐसे में Loco Pilot Washroom का विकल्प स्टेशन तक सीमित होने के कारण उन्हें वॉशरूम के लिए इंतजार करना पड़ता है। यह स्थिति असहज हो सकती है लेकिन वे इसे प्रोफेशनल तरीके से संभालते हैं।

6. वॉशरूम वाले इंजन की शुरुआत – राहत की उम्मीद

अब रेलवे Loco Pilot Washroom की सुविधा वाले इंजनों की दिशा में कदम बढ़ा रही है। वंदे भारत एक्सप्रेस जैसे ट्रेनों में यह सुविधा शुरू हो चुकी है, जहां दो लोको पायलट होते हैं और इंजन में अटैच वॉशरूम होता है। एक पायलट वॉशरूम जाता है तो दूसरा इंजन की निगरानी करता है।

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7. भविष्य में सभी इंजनों में वॉशरूम – गेम चेंजर सुविधा

टाटानगर रेलवे फैक्ट्री में ऐसे नए इंजन बनाए जा रहे हैं जिनमें Loco Pilot Washroom की सुविधा होगी। इससे लोको पायलटों को बार-बार स्टेशन के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा और ट्रेन ऑपरेशन और भी सुगम हो जाएगा।

निष्कर्ष: बदलाव की ओर कदम

फिलहाल लोको पायलटों को वॉशरूम के लिए स्टेशन का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन रेलवे का यह प्रयास कि हर इंजन में Loco Pilot Washroom की सुविधा हो, उनके लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है। इससे उनकी कार्यशैली, स्वास्थ्य और ऑपरेशनल एफिशिएंसी तीनों में सुधार होगा।

 

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