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Shocking Revelations: SEBI Bars Jane Street & Freezes $566M for Nifty Manipulation: चौंकाने वाले खुलासे: सेबी ने जेन स्ट्रीट पर लगाई रोक, निफ्टी में हेराफेरी के आरोप में $566 मिलियन फ्रीज किए.

SEBI Bars Jane Street: भारत में एक ऐतिहासिक कार्रवाई

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने SEBI Bars Jane Street शब्द में अपनी शक्ति का परिचय देते हुए अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट ग्रुप को भारतीय प्रतिभूति बाजार से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया है। यह कदम 3 जुलाई 2025 को जारी 105 पृष्ठों के अंतरिम आदेश के माध्यम से उठाया गया जिसमें SEBI ने आरोप लगाया कि जेन स्ट्रीट ने Nifty 50 और Bank Nifty इंडेक्स के साथ छेड़छाड़ कर भारी मात्रा में अवैध लाभ कमाए ।

इस आदेश में SEBI ने रु 48.4 अरब (लगभग $566.3 मिलियन) की जमकों पर रोक लगा दी है और बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी खाते से डेबिट केवल SEBI की अनुमति पर ही हो सकता है ।

SEBI Bars Jane Street

क्या था आरोप: Manipulative Trading Strategies

SEBI ने दो प्रमुख रणनीतियों का खुलासा किया है:

1. Intraday Index Manipulation:
जेन स्ट्रीट ने Bank Nifty और Nifty के कंपोनेंट स्टॉक्स को सुबह के दौरान बड़े पैमाने पर खरीदा, ताकि इंडेक्स को ऊपर धकेला जा सके और फिर उसी दिन बड़ी पूट ऑप्शन पोजीशन से फायदा उठाया ।
2. Extended Marking the Close:
ऑफिसियल एक्सपायरी से पहले शाम के अंतिम घंटे में, कंपनी ने क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने के लिए बड़े सौदे किए। इससे ऑप्शन सेटलमेंट उनकी ओर झुका और भारी मुनाफा हुआ ।

 

इन रणनीतियों से केवल 15 Bank Nifty और 3 Nifty के दिनों में ₹3,914 करोड़ से अधिक का मुनाफा हुआ, जबकि कुल 18 दिनों में ₹4,843 करोड़ तक का अवैध लाभ दर्ज हुआ ।

SEBI Bars Jane Street

क्यों यह कदम विशेष है?

भारत का डेरिवेटिव बाजार विश्व में सबसे बड़ा है, और यहाँ विदेशी प्राइसिंग रणनीतियों का गहरा असर है। SEBI ने अपनी 105 पृष्ठों की रिपोर्ट में लिखा कि इन ट्रेडिंग पैटर्न्स का कोई “वैध आर्थिक आधार” नहीं था ।

Guest trading firms जैसे Citadel, IMC Trading, Optiver का बाजार में बढ़ता दबदबा भले ही जारी है, SEBI ने उनके व्यवहार की कड़ाई से निगरानी करने का संकेत दिया है ।

जेन स्ट्रीट की प्रतिक्रिया

जेन स्ट्रीट ने SEBI के आरोपों का खंडन किया है और संवाद जारी रखने का आश्वासन दिया है। उनका कहना है कि वे “विश्व भर की सभी नियामकीय प्रणालियों का पालन करते हैं” ।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उनकी रणनीतियाँ केवल वैध ट्रेडिंग थीं या बाजार को प्रभावित करने वाली मनिपुलेटिव गेमिंग?

पीड़ित कौन थे? भारतीय रिटेल निवेशक!

SEBI ने स्पष्ट किया है कि इस मैनिपुलेशन से रिटेल निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वर्ष 2024 में विदेशी और proprietary ट्रेडर्स ने ₹610 बिलियन से अधिक का लाभ उठाया, जबकि खुदरा निवेशकों को लगभग समान राशि का नुकसान झेलना पड़ा ।

इसके अलावा, National Stock Exchange ने जेन स्ट्रीट को फरवरी 2025 में चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद ट्रेडिंग पैटर्न जारी रहा ।

आगे की दिशा: क्या बदलेगा?

अंतिम आदेश की प्रतीक्षा:
SEBI ने फर्म को जवाब दाखिल करने और सुनवाई का मौका दिया है। इसमें किसी भी नए डेटा या तरकीब की जांच हो सकती है ।

निगरानी व नियामक कड़े नियम:
अब SEBI ने algorithmic trading के software ऑडिट को अनिवार्य करने का फैसला किया है और इंट्राडे ट्रेड्स पर सीमाएँ लागू की जाएंगी ।
शुरुआत 1 जुलाई, 2025 से ही SEBI ने इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं ।

डेरिवेटिव मार्केट की पारदर्शिता:
इस मामले ने दिखाया कि इंडियन डेरिवेटिव मार्केट में भारी मात्रा में अल्गोरिदमिक और उच्च-आवृत्ति ट्रेडिंग हो रही है। आगे इसके लिए surveillance thresholds को कम करना हो सकता है ।

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निष्कर्ष:

SEBI ने SEBI Bars Jane Street के कदम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत में वित्तीय बाजार में मनिपुलेशन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कार्रवाई से फर्म को भारी आर्थिक और प्रतिष्ठात्मक क्षति हुई। साथ ही यह रिटेल निवेशकों के हितों की सुरक्षा के प्रति SEBI की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।जेन स्ट्रीट द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके विरुद्ध उठाए गए कदमों ने भारतीय बाजार की पारदर्शिता को मजबूती से पुन: स्थापित किया है। आगामी Hearing और Final Order से पता चलेगा कि SEBI की यह कार्रवाई कितनी दृढ़ और दीर्घकालिक होती है।

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