7 अद्भुत कारण क्यों Puri Rath Yatra 2025 बन गई देश की सबसे दिव्य यात्रा!
Puri Rath Yatra 2025 का शुभारंभ 27 जून को ओडिशा के पुरी में बड़े ही भव्य और ऐतिहासिक ढंग से हुआ। यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की आस्था, परंपरा और संगठनात्मक क्षमता का प्रतीक बन चुकी है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष की Puri Rath Yatra को इतना विशेष क्यों माना जा रहा है।
1. तीन देवताओं की रथ यात्रा: अनोखा दृश्य
भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विशाल रथों को पुरी शहर की सड़कों पर श्रद्धालुओं द्वारा खींचा गया। Puri Rath Yatra में इस साल लगभग 10 लाख से अधिक भक्तों की भागीदारी देखी गई।
2. अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम
इस साल Puri Rath Yatra के लिए 10,000 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए। NSG स्नाइपर्स, ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम, एंटी-टेरर स्क्वाड और AI CCTV कैमरों की मदद से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
3. ट्रैफिक और पार्किंग की स्मार्ट प्लानिंग
पुरी प्रशासन ने इस बार 21 पार्किंग ज़ोन, 5 होल्डिंग एरिया और विशेष बस रूट्स तय किए। भक्तों की सुविधा के लिए शटल सेवा और ऑटो-रिक्शा के लिए विशेष लेन भी बनाई गई। Puri Rath Yatra के दौरान पुरी शहर को आंशिक रूप से वाहन-मुक्त क्षेत्र घोषित किया गया।
4. सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समागम
Puri Rath Yatra के दौरान कई विशेष अनुष्ठान होते हैं जैसे पहांडी यात्रा, चेहरा पहरा (गोल्डन झाड़ू से रथों की सफाई), बनाटी (अग्नि नृत्य), और सुना वेषा, जिसमें भगवान को सोने के आभूषण पहनाए जाते हैं। यह सभी परंपराएं इस यात्रा को अद्वितीय बनाती हैं।
5. बैंक हॉलिडे और भीड़ नियंत्रण
ओडिशा और मणिपुर में Puri Rath Yatra के दिन यानी 27 जून को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया। इससे लोगों को यात्रा में शामिल होने का भरपूर अवसर मिला।
6. स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान
पुरी प्रशासन ने हेल्थ कियोस्क, शुद्ध पेयजल, मेडिकल स्टाफ और आपातकालीन सेवाएं चौबीसों घंटे उपलब्ध कराईं। गर्मी और भीड़ को देखते हुए विशेष सावधानियां बरती गईं।
ये भी पढ़ें:Empowering Students:छात्रों को सशक्त बनाने वाली: 8 शक्तिशाली दैनिक आदतें.
7. डिजिटल प्रसारण और लाइव दर्शन
जो लोग पुरी नहीं पहुंच सके, उन्होंने Puri Rath Yatra को टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव देखा। डिजिटल युग में यह परंपरा और तकनीक का संगम है।
निष्कर्ष
Puri Rath Yatra 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत में आस्था और प्रबंधन जब एक साथ चलते हैं, तो चमत्कार होते हैं। अगर आपने इस बार इस यात्रा का अनुभव नहीं लिया, तो अगली बार इसे अपनी जीवन सूची में ज़रूर शामिल करें।
आपको यह जानकारीपूर्ण लेख कैसा लगा? नीचे कमेंट करें और अपने अनुभव साझा करें।

