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ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के बाद देश का मूड: क्या सोचता है भारत? Operation Sindoor aur Ceasefire ke baad desh ka mood: Kya sochta hai Bharat?

 

ऑपरेशन सिंदूर और सीजफायर के बाद देश का मूड: क्या सोचता है भारत?

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इसके जवाब में भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंक के आकाओं को उन्हीं की जमीन पर सबक सिखाने का फैसला किया। तीन दिन तक भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात रहे, और अंत में 10 मई की शाम को सीजफायर की घोषणा कर दी गई। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर देश की जनता क्या सोचती है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए सी-वोटर ने एक ताज़ा सर्वे किया।

सरकार की कार्रवाई पर जनता की राय

सर्वे के मुताबिक, 68.1% लोगों ने कहा कि वे मोदी सरकार की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट हैं। वहीं, 5.3% लोग इससे असहमति जताते दिखे, और 15.3% की राय अब भी स्पष्ट नहीं है। इसका सीधा अर्थ है कि बड़ी आबादी को सरकार की जवाबी कार्रवाई पर भरोसा है।

सीजफायर पर भी दिखा समर्थन

जब सीजफायर को लेकर सवाल पूछा गया, तो 63.3% लोगों ने कहा कि वे इसके फैसले से संतुष्ट हैं। हालांकि, 10.2% लोगों ने इसे गलत फैसला बताया, और 17.3% लोग इस मुद्दे पर स्पष्ट राय नहीं दे सके।

भारतीय सेना पर भरोसा और भी मजबूत हुआ

सीजफायर से पहले 91.1% लोगों को भारतीय सेना की क्षमता पर “बहुत ज्यादा” भरोसा था। सीजफायर के बाद यह आंकड़ा और बढ़ा और 92.3% लोगों ने सेना पर गहरा विश्वास जताया। इसका मतलब साफ है कि सेना की कार्रवाई ने जनता के भरोसे को और मजबूत किया है।

भारत का सबसे बड़ा दुश्मन: चीन या पाकिस्तान?

इस सवाल ने लोगों की राय को एक नई दिशा दी। सीजफायर से पहले 47.4% लोगों ने चीन को भारत का सबसे बड़ा दुश्मन बताया, जबकि पाकिस्तान को यह दर्जा सिर्फ 27.7% ने दिया। दिलचस्प बात यह है कि सीजफायर के बाद चीन को भारत का सबसे बड़ा खतरा मानने वालों की संख्या बढ़कर 51.8% हो गई। पाकिस्तान के प्रति यह आंकड़ा गिरकर 19.6% रह गया। वहीं, 20.7% लोगों ने दोनों को समान रूप से खतरा माना।

निष्कर्ष

सी-वोटर का यह सर्वे साफ दर्शाता है कि देश की जनता पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख और सेना की जवाबी कार्रवाई से संतुष्ट है। साथ ही, यह भी साफ होता जा रहा है कि जनता की नजर में चीन अब भारत के लिए सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा बनकर उभर रहा है। ऐसे में सरकार और सेना दोनों के लिए यह जनसमर्थन भविष्य की नीति निर्धारण में अहम भूमिका निभा सकता है।

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