
2025 में धीमा होगा लग्जरी कार बाजार, मर्सिडीज-बेंज को ज्यादा बढ़त की उम्मीद नहीं,
2025 के जनवरी से मार्च के बीच लग्जरी कार बाजार की वृद्धि दर कोविड-19 के बाद से सबसे धीमी हो सकती है। अगर यह रुझान जारी रहा, तो यह पहली बार होगा जब 2020 के बाद इस सेगमेंट में गिरावट दर्ज की जाएगी।
कमजोर बाजार, घटती मांग :-
कोविड-19 के बाद से भारतीय लग्जरी कार बाजार ने जबरदस्त वृद्धि दर्ज की थी, जो मुख्यधारा के ऑटोमोबाइल बाजार से तेज़ थी। लेकिन अब शेयर बाजार में गिरावट और वैश्विक अस्थिरता के चलते उपभोक्ताओं की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिससे इस सेक्टर में सुस्ती देखी जा रही है।
मर्सिडीज-बेंज इंडिया के एमडी, संतोष अय्यर के मुताबिक, अगले कुछ महीनों में लग्जरी कार बाजार में वृद्धि दर स्थिर रह सकती है या मामूली गिरावट देखी जा सकती है। हालांकि, उन्होंने सेक्टर के दीर्घकालिक विकास को लेकर भरोसा जताया है।
हमने साल की शुरुआत में ही कहा था कि यह साल स्थिर वृद्धि वाला होगा। लेकिन फिलहाल, बाजार में उपभोक्ताओं की भावना कमजोर है, खासकर शेयर बाजार और अन्य क्षेत्रों में अनिश्चितता के कारण,
2024 में भारतीय लग्जरी कार बाजार 6-7% बढ़ा था, जबकि मुख्यधारा के ऑटोमोबाइल बाजार की वृद्धि दर 4% थी। 2021 से 2023 के बीच, इस सेगमेंट की वृद्धि दर मुख्यधारा के बाजार से दोगुनी रही थी। हालांकि, 2025 की शुरुआत में ही इस पर असर दिखने लगा है—जनवरी में 12% की वृद्धि के बाद, फरवरी में यह घटकर 5% रह गई और मार्च में भी सुस्ती बनी हुई है।
क्या आगे बाजार सुधरेगा?
हालांकि, अय्यर को उम्मीद है कि साल के दूसरे भाग में मांग में सुधार होगा।
बुनियादी रूप से अर्थव्यवस्था और उपभोग में कोई बड़ी समस्या नहीं है। हमारे प्रोडक्ट्स शानदार हैं, ब्रांड की मांग भी बनी हुई है, इसलिए सही समय पर वृद्धि वापस आएगी, उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी माना कि अगले एक-दो तिमाहियों में बाजार स्थिर रह सकता है या हल्की गिरावट देखी जा सकती है, लेकिन फिर सुधार की संभावना है।
टेस्ला के आने का असर?
भारतीय बाजार में टेस्ला की संभावित एंट्री को लेकर अय्यर ने कहा कि नए खिलाड़ी आने से बाजार का विस्तार होगा।
नए खिलाड़ी हमेशा बाजार को बढ़ाने में मदद करते हैं, इसलिए प्रतिस्पर्धा का स्वागत है, उन्होंने कहा। हालांकि, मर्सिडीज-बेंज का ध्यान मुख्य रूप से प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट पर केंद्रित है।
महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में इलेक्ट्रिक वाहनों पर 6% कर लगाया है, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है। अय्यर ने बताया कि टैक्स में बदलाव से अस्थायी रूप से बिक्री प्रभावित हो सकती है, लेकिन लंबे समय में EVs की मांग बढ़ेगी।
मुद्रा विनिमय दर का प्रभाव और कीमतों में बढ़ोतरी :-
मर्सिडीज-बेंज इंडिया ने इस साल जनवरी और मार्च में पहले ही कीमतें बढ़ाई थीं। यूरो-रुपये की विनिमय दर में तेज़ वृद्धि से आगे भी दाम बढ़ने की संभावना है।
यूरो पहले 90 रुपये पर था, अब यह 95 के स्तर पर पहुंच गया है। अगर यह बढ़ता रहा, तो हमें अप्रैल में एक और मूल्य वृद्धि करनी पड़ सकती है,”
भविष्य की रणनीति :-
कंपनी आमतौर पर सालाना मूल्य संशोधन करती है, लेकिन अगर विनिमय दर में बड़ा उतार-चढ़ाव होता है, तो इसे बीच में भी समायोजित किया जा सकता है।
हर 5 रुपये की वृद्धि से लागत 5-8% तक बढ़ जाती है, जो महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है, उन्होंने कहा।
बाजार में अस्थिरता के बावजूद, मर्सिडीज-बेंज इंडिया को उम्मीद है कि उपभोक्ता भावना स्थिर होने के साथ ही लग्जरी कार बाजार फिर से रफ्तार पकड़ लेगा।
