क्या शेयर बाजार में आई गिरावट एक स्वस्थ सुधार है या किसी बड़ी मंदी का संकेत? जानिए विशेषज्ञों की राय
नई दिल्ली, 20 मई 2025 —
भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की है, जिससे निवेशकों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह गिरावट एक सामान्य सुधार (Healthy Pullback) है या फिर बाज़ार किसी गहरी मंदी (Major Correction) की ओर बढ़ रहा है?
मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स में 872.98 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 1.06% टूटकर 81,186.44 पर बंद हुआ। इसी तरह, निफ्टी 50 में भी 261.55 अंकों की गिरावट आई और यह 24,683.90 के स्तर पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा सत्र था जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ।
गिरावट के कारण:
1. मुनाफावसूली (Profit Booking) – हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू किया, खासकर दिग्गज शेयरों में।
2. वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल – अमेरिका और अन्य देशों में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से जोखिम वाले एसेट्स से पैसे निकल रहे हैं।
3. कोविड मामलों में फिर से वृद्धि – कुछ देशों में कोविड मामलों में अचानक उछाल ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?
1. स्वस्थ सुधार का संकेत:
कई बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट एक ‘स्वस्थ सुधार’ है। मार्केट में हाल ही में काफी तेज़ी देखने को मिली थी, और इस तरह के सुधार बाजार को संतुलन में लाने के लिए जरूरी होते हैं। इससे निवेशकों को नए सिरे से खरीदारी का मौका मिलता है।
2. दीर्घकालिक निवेशकों को चिंता नहीं करनी चाहिए:
विशेषज्ञों का मानना है कि जिनका नजरिया लंबी अवधि का है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। बाजार में मजबूत फंडामेंटल्स अब भी मौजूद हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में गति बनी हुई है।
3. कुछ सावधानी जरूरी:
हालांकि, कुछ विश्लेषक सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि ग्लोबल संकेत अच्छे नहीं हैं और अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में और कमजोरी आ सकती है।
निवेशकों के लिए सलाह:
लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं तो घबराएं नहीं।
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।
गिरावट के दौरान मजबूत कंपनियों के शेयरों पर नजर रखें।
ग्लोबल संकेतों पर भी नजर बनाए रखें।
निष्कर्ष:
फिलहाल बाजार में आई गिरावट को एक सामान्य सुधार माना जा सकता है, लेकिन यदि वैश्विक अस्थिरता और घरेलू बिकवाली बढ़ती है, तो यह गिरावट गहराई भी ले सकती है। ऐसे में निवेशकों को संयम और विवेक से काम लेना होगा।




